dardshayari

सीख जाओ वक्त पर किसी की चाहत की कदर
करना, कहीं कोई थक ना जाए तुम्हें एहसास दिलाते
-दिलाते ~~~~~
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तुमने भी तो कोशिश नही की मुझे समझने की….. वरना वजह कोई नही थी तेरे और मेरे उलझने की..
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कुछ बातों को करीने से लगाकर,
वो जाता है à¤..क़्सर मुझे बहलाकर
कीमती हैं मेरे पास यादें तुम्हारी
इनको रखा है त़ह पे त़ह लगाकर
खोज़ना है किसी à¤..पने को पर
गया है वो चेहरे पे चेहरा लगाकर
बेगाना तो नहीं पर कैसे कहूं à¤..पना,
जो गया है मुझे à¤..जनबी बनाकर ~~~
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❤❤ "मिटा दिया हर जगह से तेरा नाम..
.
.
"मगर आज भी जिन्दा है तेरा वजूद à¤..श्कों में मेरे..💔💔💔


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मेरी मोहब्बत तो ताउम्र रहेगी......
तुम्हें पढ़ना,,,तुम्हें सोचना ,,
फिर तुम्हें ही लिखना़... हक है मेरा..
चाहे कितना भी दूर चली जाओ तुम
ये मेरा हक़ तुम कभी भी नहीं
छीन सकती.... कभी भी नहीं......
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एक शब्द है ( मोहब्बत )
इसे कर के देखो
तुम तड़प ना जाओ तो कहना,
एक शब्द है ( मुकद्दर )
इससे लड़कर देखो
तुम हार ना जाओ तो कहना,
एक शब्द है ( वफा )
जमाने में नहीं मिलती
कहीं ढूंढ पाओ तो कहना,
एक शब्द है ( आँसू )
दिल में छुपा कर रखो
तुम्हारी आँखों से ना निकल जाए तो कहना,
एक शब्द है ( जुदाई )
इसे सह कर तो देखो तुम टूट कर बिखर ना जाओ तो कहना,
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ग़र लिखूँ कभी कहानी... ज़िन्दगी की ....
तेरे ज़िक्र से शुरू करूँ ..तेरे नाम पे तमाम कर दूँ ..
क्या करूँ ?
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à¤..गर आदमी छोड़कर जाए तो उसे रोक लो, वो रुक जाएगा लेकिन à¤..गर औरत छोड़कर जाए तो उसे मत
रोकना वो रुकेगी नहीं क्योंकि वो जाने से बहुत पहले
ही आपको छोड़कर जा चुकी होती हैं बस आपको
उसके जाने का एहसास नहीं होता~~~
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जिंदगी भी बेरहम साहूकार है ..
नींद गिरवी ले के .. ख्वाब बेचती है..
आसुओं की सूद पे.. खुशी देती है…
रिश्तों के बदले में.. रिश्ते छीन लेती है..
शब्दों के बड़े महँगे भाव हैं ….
और भावनाएँ… कौड़ियों के दाम पे है ..
जिंदगी से ऐसे ही एक सौदे में…
हार रहा हूँ मैं…
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कल एक झलक ज़िंदगी को देखा,
वो राहों पे मेरी गुनगुना रही थी,
फिर ढूँढा उसे इधर उधर
वो आँख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी,
एक à¤..रसे के बाद आया मुझे क़रार,
वो सहला के मुझे सुला रही थी
हम दोनों क्यूँ ख़फ़ा हैं एक दूसरे से
मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,
मैंने पूछ लिया- क्यों इतना दर्द दिया
कमबख़्त तूने,
वो हँसी और बोली- मैं ज़िंदगी हूँ…….
तुझे जीना सिखा रही थी…..
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सुनो साहिबा
मोहब्बत एक ख़ुशबू है जो हमेशा साथ चलती है,
कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता!!
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बहुत लंबे à¤..रसे के बाद
हम एक दूसरे से एक रेस्तरां में टकरा गए थे
उसने काà¥..फी आर्डर की
और चुप्पी तोड़ते हुए पूछा
काफी बरस बीत गए ,घर बना लिया à¤..पना ...??
काà¥..फी का कप तकते हुए दबी आवाज़ में मैं बस इतना ही कह पाया
घर तुम्हारे बिना बन नहीं सकता था
और मकान बनाना मेरे दिल ने नहीं चाहा
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