dardshayari


"मरना भी मुनासिब नही हो रहा..

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"और à¤..ब जीने की भी चाहा नही रही..
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"नफरत करनी थी तो इजहार क्यों किया ?
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"जब छोडना था साथ तो फिर प्यार क्यों किया ?


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"कुछ समझ नहीं आ रहा..
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"कि जिंदगी तुझे भुलाने में कट रही है,या तुझे याद करने में..



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"आँखें थक गई है आसमान को देखते देखते..
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"पर वो तारा नहीं टूटता जिसे देखकर तुम्हें मांग लूँ..




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"झुठ बोलकर तो मैं भी दरिया पार कर जाता,
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"डूबो दिया मुझे सच बोलने की आदत ने..


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"वो दो पल थे तेरी और मेरी मुस्कान के बीच..
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"बस वही कही इश्क़ ने जगह बना ली थी..




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"जिस चाँद के हजारो चाहने वाले हो..
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"वो क्या समझेगा एक सितारे कि कमी को..


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"सिर्फ तुझे चाहने का ही तो जुर्म किया था..
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"तूने तो पल पल मरने की सजा दे दी..



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"इश्क है या कुछ और à¤..ब कुछ समझ नहीं आता..
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"एक खुबसूरत ख्याल हो तुम जो दिल से नहीं जाता..



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"जिनके दिल बहुत à¤..च्छे होते हैं ..
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"à¤..क्सर उन्हीं की किस्मत खराब होती है..



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"कितना चाहता हूँ तुम्हे यह तो नहीं बता सकता..
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"लेकिन ऐसा कोई पल नही जिसमे मैंने तुम्हें याद ना किया हो..



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"सवाल तो बेआवाज़ रातों का है..
"दिन तो गुज़र ही जाते हैं, ज़रूरतों के शोर में..

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