desi-Shayari


किसी को भनक तक ना थी मेरे इश्क़ की..

वो तेरा मुड़ मुड़ के देखना हमे बदनाम कर गया.
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रो दूँ अगर तुम्हारे सामने तो समझ जाना तुम,
कि मेरी बर्दास्त करने की वो आखरी हद थी. ..
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करीब आओ तो शायद हमें समझ लोगे,

ये फासले तो....ग़लतफ़हमियां है !
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मुश्किलें दे-देकर मदद करता है ll
मेरे मालिक तू भी हद करता है ll
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Yaadon ke Basere mai har pal tum rehti ho,
Paas nahi ho tum toh kya hua,
Aansu bankar har pal tum behti ho..
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बड़े करीब थे वो लोग..
जिन्होंने दूरियों के मायने समझाए है..!!
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वो कि इक मुद्दत तलक जिस को भला कहता रहा

आह अब किस मुँह से ज़िक्र उस की बुराई का करूँ
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अंहकार और पेट जब बढ़ जाता है,
तो इंसान चाह कर भी गले नहीं मिल सकता !!
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आईना फैला रहा है खुदफरेबी का ये मर्ज,
हर किसी से कह रहा है आप सा कोई नहीं।
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मुझ से मिलना तो तेरे ही नसीब में था शायद.....
इतनी हसीन तो मेरे हाथों की लकीरें नही थी....!!!!
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चेहरे‬ का खूबसूरत होना काफ़ी नहीं होता,
इंसान का दिल‬ भी ‪खूबसूरत‬ होना चाहिये !!
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फितरत सोच और हालात में फर्क है वरना,
इन्सान कैसा भी हो दिल का बुरा नहीं होता।
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